Tag: health

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कैंसर के इलाज का फ़ैसला: हर मरीज़ को पूछने चाहिए ये 7 सवाल

ये 7 सवाल मरीज़ों और परिवारों को डॉक्टर से सही बात पूछने और इलाज की योजना को अच्छी तरह समझने में मदद करते हैं। नई दिल्ली, 26 अक्टूबर: कैंसर का पता चलने के बाद परिवार के सामने सबसे बड़ी चुनौती होती है: कम समय में सही फ़ैसला लेना। ब्रेस्ट कैंसर जागरूकता माह के मौके पर Oncare Cancer Centre ने ऐसे 7 ज़रूरी सवाल साझा किए हैं, जो हर मरीज़ और परिवार को इलाज शुरू करने से पहले अपने डॉक्टर से पूछने चाहिए। सही सवाल पूछना क्यों ज़रूरी है कई मरीज़ और परिवार डॉक्टर के सामने घबराहट में सवाल पूछना भूल जाते हैं। घर लौटकर मन में कई सवाल आते हैं, पर तब तक इलाज की तैयारी शुरू हो चुकी होती है। कैंसर का इलाज हर मरीज़ के लिए अलग होता है। यह कैंसर के प्रकार, उसकी स्टेज, जाँच की रिपोर्ट और मरीज़ की सेहत पर निर्भर करता है। इसलिए इलाज शुरू करने से पहले पूरी जानकारी होना मरीज़ का हक़ भी है और समझदारी भी। “जानकारी रखन...
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हर बच्चे पर थेरेपी का अलग असर, सही योजना के लिए मनोवैज्ञानिक आकलन ज़रूरी

इंदौर की बाल मनोवैज्ञानिक का कहना है कि थेरेपी तभी असरदार होती है जब वह बच्चे की ज़रूरत के अनुरूप हो इंदौर (मध्य प्रदेश) [भारत], 27 अक्टूबर: शुरुआती हस्तक्षेप पर हुए शोध की एक बात बार-बार सामने आती है : हर बच्चा एक ही उपचार पर एक जैसी प्रतिक्रिया नहीं देता। ‘पीडियाट्रिक्स’ पत्रिका (2011) की एक व्यवस्थित समीक्षा में पाया गया कि बच्चों के नतीजों में बड़ा अंतर होता है और पहले से यह बताना कठिन है कि किसे किस तरीक़े से ज़्यादा लाभ मिलेगा। माता-पिता यही अपने घर में देखते हैं: थेरेपी शुरू होती है, कुछ महीने बदलाव दिखता है, फिर प्रगति ठहर जाती है। विशेषज्ञों के अनुसार इसका उत्तर अक्सर थेरेपी से पहले की कड़ी में है, यानी संपूर्ण बाल मनोवैज्ञानिक आकलन, जो बताता है कि बच्चा क्या पहले से कर पाता है, असली कठिनाई कहाँ है और मदद कहाँ से शुरू हो। इसका मतलब देरी नहीं है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ...
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कैंसर के इलाज का फ़ैसला: हर मरीज़ को पूछने चाहिए ये 7 सवाल

ये 7 सवाल मरीज़ों और परिवारों को डॉक्टर से सही बात पूछने और इलाज की योजना को अच्छी तरह समझने में मदद करते हैं। नई दिल्ली, 26 अक्टूबर: कैंसर का पता चलने के बाद परिवार के सामने सबसे बड़ी चुनौती होती है: कम समय में सही फ़ैसला लेना। ब्रेस्ट कैंसर जागरूकता माह के मौके पर Oncare Cancer Centre ने ऐसे 7 ज़रूरी सवाल साझा किए हैं, जो हर मरीज़ और परिवार को इलाज शुरू करने से पहले अपने डॉक्टर से पूछने चाहिए। सही सवाल पूछना क्यों ज़रूरी है कई मरीज़ और परिवार डॉक्टर के सामने घबराहट में सवाल पूछना भूल जाते हैं। घर लौटकर मन में कई सवाल आते हैं, पर तब तक इलाज की तैयारी शुरू हो चुकी होती है। कैंसर का इलाज हर मरीज़ के लिए अलग होता है। यह कैंसर के प्रकार, उसकी स्टेज, जाँच की रिपोर्ट और मरीज़ की सेहत पर निर्भर करता है। इसलिए इलाज शुरू करने से पहले पूरी जानकारी होना मरीज़ का हक़ भी है और समझदारी भी। “जानकारी रखन...
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शल्बी अस्पताल, सूरत ने एडवांस्ड किडनी ट्रांसप्लांट में नए मील के पत्थर स्थापित किए

सूरत (गुजरात) [भारत],16 सितंबर: शल्बी अस्पताल ने पिछले 12 महीनों में स्वैप (swap) और ABO-इनकंपैटिबल (अलग ब्लड ग्रुप) प्रक्रियाओं में उन्नत नैदानिक सफलताओं के साथ 25 किडनी ट्रांसप्लांट सफलतापूर्वक पूरे किए हैं। एडवांस्ड ट्रांसप्लांट की मुख्य विशेषताएं और विशेषज्ञ टीम का सहयोग 25 सफल ट्रांसप्लांटः एक अत्यधिक समन्वित मल्टीडिसिप्लिनरी (बहु-विषयक) टीम द्वारा पिछले वर्ष के दौरान पूरे किए गए। अग्रणी स्वैप और ABO-इनकंपैटिबल प्रक्रियाएं: दक्षिण गुजरात का पहला प्राइवेट/कॉर्परिट स्वैप किडनी ट्रांसप्लांट, कई ABO-इनकंपैटिबल ट्रांसप्लांट और एक जटिल री-ट्रांसप्लांट सफलतापूर्वक संपन्न किया गया। दक्षिण गुजरात का पहला जटिल ट्रांसप्लांटः जिसमें मरीज का यह दूसरा ट्रांसप्लांट था और यह ABO-इनकंपैटिबल (अलग ब्लड ग्रुप) था। विशेष क्रिटिकल केर और एनेस्थीसियाः क्रिटिकल केयर स्पेशलिटी (डॉ. अरुल और उनकी टीम) तथा एनेस्...
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डायलिसिस एक्सेस: भारत में CKD मरीजों के लिए Vascular Surgeon की बढ़ती आवश्यकता

नई दिल्ली,13 अगस्त: भारत में Chronic Kidney Disease (CKD) और End-Stage Kidney Disease (ESKD) के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। हर वर्ष हजारों नए मरीजों को हीमोडायलिसिस की आवश्यकता पड़ती है। डायलिसिस की सुविधाएँ बढ़ रही हैं, लेकिन एक महत्वपूर्ण चुनौती आज भी बनी हुई है—समय पर सुरक्षित और टिकाऊ vascular access की उपलब्धता तथा प्रशिक्षित Vascular Surgeons की कमी। Indian Journal of Vascular and Endovascular Surgery में प्रकाशित “Arteriovenous Access: The Unsung Hero of Vascular Surgery – An Indian Perspective” में भी इस बात पर बल दिया गया है कि भारत में dialysis access की सबसे बड़ी चुनौतियों में समय पर विशेषज्ञ तक पहुँच और vascular access सेवाओं का सीमित प्रसार शामिल है। वास्तविक समस्या यह है कि अधिकांश मरीज Vascular Surgeon के पास तब पहुँचते हैं जब डायलिसिस पहले ही शुरू हो चुकी होती है। क...
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वडोदरा में डॉ. मनु शर्मा ने 150 सफल Knee Replacement Surgery का मुकाम हासिल किया

सूरत (गुजरात) [भारत],22 जुलाई: 15,000+ सफल Knee Replacement Procedures का अनुभव और Patient-Centric Treatment के साथ वडोदरा में आधुनिक Knee Replacement Care को मिल रही नई पहचान भारत में Knee Replacement Care तेजी से आधुनिक तकनीकों की ओर बढ़ रहा है। बेहतर Surgical Techniques, आधुनिक Implant Technology और Patient-Centric Treatment के कारण मरीजों को पहले की तुलना में अधिक सटीक उपचार और तेज़ Recovery का लाभ मिल रहा है। इसी बदलाव के बीच गुजरात के वरिष्ठ Knee Replacement Surgeon डॉ. मनु शर्मा ने वडोदरा में 150 सफल Knee Replacement Surgeries पूरी कर एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। खास बात यह है कि उन्होंने यह मुकाम बहुत कम समय में हासिल किया है, जो उनके प्रति मरीजों के बढ़ते विश्वास और आधुनिक Knee Replacement Treatment की बढ़ती स्वीकार्यता को दर्शाता है। दो दशकों से अधिक के अनुभव के साथ डॉ. मनु...
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भारत की अग्रणी CAR T-सेल थेरेपी से ब्लड कैंसर मरीजों को दो साल तक राहत

बेंगलुरु (कर्नाटक) [भारत], 21 मई: भारतीय ऑन्कोलॉजी देखभाल में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में, की मेड-इन-इंडिया CAR T-सेल थेरेपी ने आक्रामक ब्लड कैंसर से पीड़ित मरीजों में देश की पहली ज्ञात दीर्घकालिक रोगमुक्ति हासिल की है। वर्ष 2022 में उपचार प्राप्त करने वाले सात मरीज अब दो वर्षों से अधिक प्रोग्रेशन-फ्री सर्वाइवल (PFS) पार कर चुके हैं, जो भारत में विकसित किसी भी CAR T-सेल थेरेपी के लिए पहली उपलब्धि है। यह सफलता Immuneel के दृष्टिकोण की स्थायित्व क्षमता और आक्रामक ब्लड कैंसर के मरीजों के उपचार परिणामों को बदलने की उसकी क्षमता को मजबूत करती है। यह CAR T-सेल थेरेपी, जिसे Varnimcabtagene autoleucel (IMN-003A) के नाम से जाना जाता है, Immuneel के IMAGINE फेज-2 क्लीनिकल ट्रायल के अंतर्गत विकसित की गई है। इसका उद्देश्य relapsed या refractory CD19-positive B-cell Non-Hodgkin Lymphoma (B-NHL) से ...
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भारत की अग्रणी CAR T-सेल थेरेपी से ब्लड कैंसर मरीजों को दो साल तक राहत

बेंगलुरु (कर्नाटक) [भारत], 21 मई: भारतीय ऑन्कोलॉजी देखभाल में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में, की मेड-इन-इंडिया CAR T-सेल थेरेपी ने आक्रामक ब्लड कैंसर से पीड़ित मरीजों में देश की पहली ज्ञात दीर्घकालिक रोगमुक्ति हासिल की है। वर्ष 2022 में उपचार प्राप्त करने वाले सात मरीज अब दो वर्षों से अधिक प्रोग्रेशन-फ्री सर्वाइवल (PFS) पार कर चुके हैं, जो भारत में विकसित किसी भी CAR T-सेल थेरेपी के लिए पहली उपलब्धि है। यह सफलता Immuneel के दृष्टिकोण की स्थायित्व क्षमता और आक्रामक ब्लड कैंसर के मरीजों के उपचार परिणामों को बदलने की उसकी क्षमता को मजबूत करती है। यह CAR T-सेल थेरेपी, जिसे Varnimcabtagene autoleucel (IMN-003A) के नाम से जाना जाता है, Immuneel के IMAGINE फेज-2 क्लीनिकल ट्रायल के अंतर्गत विकसित की गई है। इसका उद्देश्य relapsed या refractory CD19-positive B-cell Non-Hodgkin Lymphoma (B-NHL) से ...
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इंदौर में ‘ऊर्जस्विनी सेंटर’ बना ऑटिज्म व डिस्लेक्सिया वाले बच्चों के लिए नई उम्मीद

इंदौर (मध्य प्रदेश) [भारत], 17 अप्रैल: बच्चों के मानसिक और शारीरिक विकास में आने वाली चुनौतियों को लेकर आजकल माता-पिता काफी जागरूक हो गए हैं। इंदौर जैसे शहर में Autism (ऑटिज्म), Down Syndrome (डाउन सिंड्रोम) और Dyslexia (डिस्लेक्सिया) जैसी समस्याओं से जूझ रहे बच्चों को सही दिशा और उपचार देने के लिए Urjasvini Child Development Center (ऊर्जस्विनी चाइल्ड डेवलपमेंट सेंटर) एक प्रमुख केंद्र बनकर उभरा है। ​सेंटर की डायरेक्टर और जानी-मानी क्लीनिकल एंड चाइल्ड साइकोलॉजिस्ट (Clinical and Child Psychologist Dr Vini Jhariya ) डॉ. विनी झारिया ने बच्चों के विकास में आने वाली इन बाधाओं और उनके समाधान पर महत्वपूर्ण जानकारी साझा की है। ​ऑटिज्म और डिस्लेक्सिया: समय पर पहचान है जरूरी- डॉ. विनी झारिया के अनुसार, अक्सर माता-पिता बच्चों के बोलने में देरी या सीखने की अक्षमता को सामान्य मानकर नजरअंदाज कर देते हैं।...
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सिद्ध अस्पताल के चेयरमैन डॉ अनुराग मेहरोत्रा की पहल :हॉस्पिटल ऑन व्हील्स से NCDs के खिलाफ अभियान

नई दिल्ली, अप्रैल 07: भारत एक ऐसी स्वास्थ्य संकट से जूझ रहा है जो संक्रमण से नहीं फैलती, फिर भी चुपचाप और लगातार लाखों लोगों को प्रभावित कर रही है। नॉन-कम्युनिकेबल डिजीज (NCDs) जैसे उच्च रक्तचाप (हाइपरटेंशन), डायबिटीज, हृदय रोग, स्ट्रोक, कैंसर और पुरानी श्वसन संबंधी बीमारियां अब देश में होने वाली अधिकांश मौतों के लिए जिम्मेदार हैं। संचारी रोगों के विपरीत, ये स्थितियां धीरे-धीरे विकसित होती हैं, अक्सर बिना किसी स्पष्ट लक्षण के, और ज्यादातर तब पता चलती हैं जब नुकसान पहले ही अपरिवर्तनीय हो चुका होता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, वर्ष 2021 में ग्लोबल स्तर पर नॉन-कम्युनिकेबल डिजीज के कारण कम से कम 4.3 करोड़ मौतें हुईं। भारत में स्थिति और भी चिंताजनक है। हाल के सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 2021 से 2023 के बीच NCDs देश में कुल मौतों का लगभग 57-63% हिस्सा हैं। बदलाव स्पष्ट है: भारत का रोग बोझ...